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आदतन अपराधियों पर सख्ती, हाज़िरी क्यों ज़रूरी?

रायसेन जिले में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अरुण कुमार विश्वकर्मा ने पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन के आधार पर मप्र राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990 के तहत आदतन अपराधियों पर निगरानी बढ़ाते हुए कार्यपालिक मजिस्ट्रेट के समक्ष नियमित उपस्थिति दर्ज कराने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन के अनुसार यह कदम किसी अफवाह या दबाव में नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून के पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। आदेश के तहत विक्रम सिंह, जो वर्ष 2012 से लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है और जिसके खिलाफ विभिन्न अपराधों में 33 प्रकरण दर्ज हैं, को आगामी तीन माह तक प्रत्येक सोमवार को तहसीलदार बरेली के समक्ष हाज़िरी देनी होगी। इसी तरह रोहित साहू को हर माह बुधवार को तहसीलदार गौहरगंज और राकेश अहिरवार को प्रत्येक माह सोमवार को तहसीलदार बाड़ी के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा धर्मेन्द्र मीना को भी आगामी तीन माह तक हर माह सोमवार को तहसीलदार रायसेन के समक्ष अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। प्रशासन ने साफ किया है कि इन आदेशों का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि निगरानी के माध्यम से अपराध की पुनरावृत्ति को रोकना है। आदेश का उल्लंघन होने की स्थिति में संबंधित थाना प्रभारी द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन का मानना है कि ऐसे कदमों से आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी और अपराधियों को यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। सवाल यह भी उठता है कि क्या नियमित हाज़िरी जैसे उपाय अपराध नियंत्रण में वास्तव में असरदार साबित होंगे, या इसके साथ और ठोस कदमों की ज़रूरत है? केके रिपोर्टर आपसे पूछता है—आपके अनुसार ऐसे आदेशों से जिले में अपराध पर कितना अंकुश लगेगा?

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