सिवनी | विशेष रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में स्टोन क्रेशर संचालन को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जिस खनन क्षेत्र की पत्थर उत्खनन लीज़ समाप्त हो चुकी है, वहां इसके बावजूद पत्थर तोड़ने, क्रशिंग और परिवहन की गतिविधियां लगातार जारी दिखाई दे रही हैं।
ग्रामीणों के हवाले से बताया गया है कि संबंधित क्षेत्र में खनन की वैध अनुमति अक्टूबर 2024 में समाप्त हो चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी भारी मशीनें, डंपर और क्रेशर सक्रिय नजर आ रहे हैं। इससे नियमों के पालन और प्रशासनिक निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पर्यावरण और स्वास्थ्य पर खतरा
मीडिया रिपोर्ट्स में ग्रामीणों की शिकायतों का हवाला देते हुए बताया गया है कि क्रेशर संचालन के कारण—
गांव में धूल, शोर और कंपन की समस्या बढ़ रही है
बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सांस, आंख और त्वचा से जुड़ी दिक्कतें हो रही हैं
कृषि भूमि और जल स्रोतों पर भी असर पड़ने की बात कही जा रही है
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज और एनओसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, जिससे नियमों के पालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतें हुईं, कार्रवाई का इंतज़ार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ग्रामीणों ने कलेक्टर, खनिज विभाग और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कार्यालयों में शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई या स्थल निरीक्षण की पुष्टि नहीं हो सकी है।
इससे प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
❓ प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों के अनुसार, यदि—
लीज़ समाप्त हो चुकी है
पर्यावरण स्वीकृति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है
शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं
तो फिर क्रेशर और खनन गतिविधियां किस आधार पर संचालित हो रही हैं, यह सवाल बना हुआ है। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
डिस्क्लेमर
यह समाचार मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय लोगों द्वारा व्यक्त की गई जानकारियों पर आधारित है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।













