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खुले आसमान तले अंतिम विदाई, विकास के दावों पर सवाल ! घोटी गांव में आज भी नहीं बना श्मशान घाट, खुले मैदान में हो रहा अंतिम संस्कार।

सिवनी/ बालाघाट
ग्रामीण विकास और मूलभूत सुविधाओं के सरकारी दावों के बीच जनपद पंचायत सिवनी की ग्राम पंचायत दिघोरी के अंतर्गत आने वाला ग्राम घोटी आज भी एक आवश्यक सुविधा—श्मशान घाट—से वंचित है।

गांव के लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार खुले मैदान में करना पड़ता है, जिससे उन्हें हर मौसम में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से श्मशान घाट निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। सरकारी अभिलेखों में विकास कार्यों के दावे किए जाते हैं, जबकि धरातल पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई देती है। अंतिम संस्कार स्थल पर न तो छाया की व्यवस्था है, न बैठने की सुविधा और न ही पेयजल जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं।
ग्रामीणों के अनुसार बारिश, तेज धूप या अन्य प्रतिकूल मौसम में अंतिम संस्कार करना बेहद कठिन हो जाता है। उनका कहना है कि सम्मानजनक अंतिम विदाई के लिए श्मशान घाट जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव विकास योजनाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत क्षेत्र में अन्य विकास कार्यों पर खर्च किए जाने के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन श्मशान घाट जैसी अत्यावश्यक सुविधा आज तक साकार नहीं हो सकी। सरपंच का कार्यकाल समाप्ति की ओर है, फिर भी यह महत्वपूर्ण कार्य अधूरा है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शीघ्र श्मशान घाट का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि गांव के लोगों को अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील परिस्थिति में सम्मानजनक और आवश्यक सुविधाएं मिल सकें।

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