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एनएसएस स्वयंसेवकों की अनोखी पहल-किचन वेस्ट से बनी जैविक खाद ने खेतों में लौटाई हरियाली । तीन दिन में तैयार तरल खाद से किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर किया प्रेरित, लागत घटाने और मिट्टी सुधार का मिला प्रभावी उपाय।

बालाघाट

राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के स्वयंसेवकों ने पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए कचरे से जैविक खाद तैयार करने का सफल प्रयोग किया है।

सोनबाटोला मुरझड फार्म क्षेत्र में कृषि महाविद्यालय बालाघाट के बीएससी कृषि चतुर्थ वर्ष के स्वयंसेवकों द्वारा किसानों को किचन वेस्ट से तरल जैविक खाद बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

इस पहल का नेतृत्व स्वयंसेवक कविता चौहान एवं उनके साथियों ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती के प्रति अपनी रुचि दिखाई। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि केले, गाजर, प्याज, आलू के छिलके, पत्ता गोभी, पालक, गुड़ और लगभग 5 लीटर पानी के मिश्रण से मात्र तीन दिनों में 100 प्रतिशत जैविक तरल खाद तैयार की जा सकती है।

विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि यह जैविक खाद नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होती है, जो पौधों की वृद्धि, जड़ों की मजबूती और फसल की गुणवत्ता सुधारने में सहायक होती है। इसके नियमित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और भूमि की दीर्घकालिक उत्पादकता में भी सुधार होता है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कचरे के बेहतर प्रबंधन के साथ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना रहा। स्वयंसेवकों ने किसानों को जागरूक करते हुए बताया कि जैविक विकल्प अपनाने से उत्पादन लागत घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम के सफल संचालन में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र भलावे एवं डॉ. अतुल श्रीवास्तव का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन रहा। वहीं कृषि महाविद्यालय बालाघाट के अधिष्ठाता डॉ. घनश्याम देशमुख के सहयोग एवं प्रेरणा से यह पहल प्रभावी रूप से संपन्न हुई।
कार्यक्रम के अंत में कई किसानों ने इस विधि को अपनाने का संकल्प लिया। स्वयंसेवकों की यह पहल न केवल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि स्वच्छता, सतत विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का भी सशक्त संदेश देती है।

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