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वन स्टॉप सेंटर की संवेदनशील पहल से बिछड़े परिवारों का हुआ पुनर्मिलन बैहर और बालाघाट सेंटर की तत्परता से दो पीड़ित महिलाओं को मिला सुरक्षित सहारा ।

जिला संवाददाता
प्रहलाद गजभिये ( अभयवाणी समाचार )

                       बालाघाट

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर

बैहर एवं बालाघाट द्वारा संकटग्रस्त महिलाओं एवं बच्चों को सुरक्षा, परामर्श और पुनर्वास उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं। हाल ही में सेंटर की संवेदनशीलता, त्वरित कार्रवाई और मानवीय प्रयासों से दो परिवारों का पुनर्मिलन संभव हो सका, जो समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है।

पहला मामला पश्चिम बंगाल निवासी वृद्ध महिला मानसी देवी (परिवर्तित नाम) से जुड़ा है। मानसिक तनाव के चलते वह अपनी बेटी एवं दामाद के घर जाते समय रास्ता भटक गईं और भटकते हुए बैहर क्षेत्र तक पहुंच गईं। क्षेत्रवासियों ने महिला को असहाय अवस्था में घूमते देखा और तत्काल 181 हेल्पलाइन पर सूचना दी। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस द्वारा महिला को सुरक्षित रूप से वन स्टॉप सेंटर बैहर पहुंचाया गया।
सेंटर में महिला को भोजन, स्वास्थ्य सहायता, अस्थायी आश्रय एवं मनोसामाजिक परामर्श उपलब्ध कराया गया। महिला केवल बंगाली भाषा जानती थीं, जिससे उनकी पहचान एवं परिजनों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद वन स्टॉप सेंटर की टीम ने गूगल ट्रांसलेट के माध्यम से संवाद स्थापित कर आवश्यक जानकारी जुटाई और पश्चिम बंगाल के संबंधित थाने से संपर्क कर परिजनों तक सूचना पहुंचाई।
सूचना मिलते ही महिला का बेटा वन स्टॉप सेंटर बैहर पहुंचा, जहां मां-बेटे का भावुक मिलन हुआ। यह पूरा घटनाक्रम वन स्टॉप सेंटर की संवेदनशील एवं मानवीय कार्यप्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।
दूसरा मामला अनुष्का (परिवर्तित नाम) से संबंधित है, जो देर रात एक सार्वजनिक पार्क में भयभीत एवं असहज अवस्था में भटकती हुई मिली। पार्क कर्मचारियों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल वन स्टॉप सेंटर को सूचना दी। सूचना प्राप्त होते ही टीम ने तत्परता दिखाते हुए अनुष्का को सुरक्षित संरक्षण में लिया तथा सेंटर में अस्थायी आश्रय, चिकित्सा सहायता एवं मनोसामाजिक परामर्श उपलब्ध कराया।
काउंसलिंग के दौरान सामने आया कि परिवार में मोबाइल फोन के उपयोग को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसके कारण तनाव में आकर वह घर छोड़कर निकल गई थी। आगे की चर्चा में यह भी पता चला कि अनुष्का मिर्गी (एपिलेप्सी) जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है और नियमित उपचार के अभाव में उसकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही थी।
वन स्टॉप सेंटर द्वारा अनुष्का के माता-पिता से संपर्क स्थापित कर संयुक्त काउंसलिंग की गई। काउंसलर ने परिवार को मानसिक स्वास्थ्य, बीमारी की गंभीरता एवं संवेदनशील व्यवहार के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। परामर्श के बाद माता-पिता ने बेहतर देखभाल एवं नियमित उपचार का आश्वासन दिया। वर्तमान में अनुष्का अपने परिवार के साथ सुरक्षित एवं खुशहाल जीवन व्यतीत कर रही है।
वन स्टॉप सेंटर की इन दोनों सफल पहलों ने यह सिद्ध किया है कि समय पर सहायता, संवेदनशील परामर्श और निरंतर प्रयासों से न केवल संकटग्रस्त व्यक्तियों को सुरक्षा प्रदान की जा सकती है, बल्कि टूटते परिवारों को भी दोबारा जोड़ा जा सकता है।

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