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मौसम विभाग ने अगले 4 दिनों के लिए जारी की एडवाइजरी
बालाघाट
मौसम विज्ञान विभाग के मौसम केंद्र भोपाल द्वारा अगले चार दिनों में प्रदेश में बदल रहें हवा पानी की स्थिति के सम्बंध में एडवाइजरी जारी की गई है। इसके अनुसार अगले 4 दिनों में बालाघाट सहित प्रदेश के कई जिलों में झोंकेदार हवाओ के दौर व कहीं कहीं वर्षा की स्थिति का अनुमान लगाया गया है। बालाघाट भी उन जिलो में शामिल है। यहां 4 अप्रैल को 40 से 50 किमी. की झोंकेदार हवाएं चलने का आंकलन किया गया है। साथ ही कहीं-कहीं बारिश के भी आसार है। मौसम विभाग ने नागरिकों को सुझाव भी दिए है।
मौसम विभाग ने सुझाये कार्य
घर के अंदर रहें, खिड़कियां और दरवाजे बंद करें और यदि संभव हो तो यात्रा से बचें। सुरक्षित आश्रय लें; पेड़ों के नीचे शरण न लें तथा तूफ़ान के दौरान जल निकायों से तुरंत बाहर निकलें। कंक्रीट के फर्श पर न लेटें और कंक्रीट की दीवारों का सहारा न लें। इलेक्ट्रिकल/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग निकाल दें एवं उन सभी वस्तुओं से दूर रहें जो बिजली का संचालन करती हैं। जानवरों को खुले पानी, तालाब या नदी से दूर रखें। रात के समय पशु को खुले स्थान पर न रखें। पशुओं का विशेष ध्यान रखें, पशुओं को विशेष संरक्षित एवं सुरक्षित पशु शेड में रखें। सभी जानवरों को रात के दौरान विशेष रूप से संरक्षित और सुरक्षित पशु शेड में रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, दोपहर के समय खेत के जानवरों को खुली चराई की अनुमति न दें। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और स्थानीय अधिकारियों जैसे आधिकारिक स्रोतों से मौसम के पूर्वानुमान और अलर्ट पर नज़र रखें। आपातकालीन किट में आवश्यक वस्तुएं जैसे कि जल्दी खराब न होने वाला भोजन, पानी, दवाइयां, टॉर्च, बैटरी और प्राथमिक चिकित्सा किट रखें। परिवहन व्यवस्था सहित निकासी के तरीके के बारे में पहले से योजना बना लें वेक्टरजनित रोग जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकिनगुनिया से बचाव हेतु प्रशासन द्वारी जारी निर्देशों का पालन करे।
कृषकों के लिए विशेष सलाह
खुले क्षेत्रों में कटाई की गई फसलें बारिश से सुरक्षा हेतु सुरक्षित स्थानों में संग्रहण करें। ओलावृष्टि से बचने के लिए फल एवं बागवानी फसलों में हैलनेट का प्रयोग करें। जिन क्षेत्रों में कटाई चल रही है या फसले तैयार खड़ी हैं उनकी कटाई अगले एक सप्ताह के लिए रोक दें। फसलों की नियमित निगरानी करें ताकि कीटों और रोगों का पता चल सके, जहां संभव हो जैव-कीटनाशकों और नीम आधारित समाधानों का उपयोग करें। अत्यधिक रासायनिक दवाओं का उपयोग करने से बचें ताकि प्रतिरोधी स्थितियां उत्पन्न न हों। ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए भूमि की तैयारी शुरू करें, हल चलाकर और जैविक खाद का उपयोग करें। खाद्य संकलन और सतत खेती पद्धतियों के माध्यम से मृदा की उर्वरता बनाए रखें।