मंडला /श्रीराम फाइनेंस कंपनी के द्वारा अंग्रेजी से लिखे पेपर पिता के हाथों थमा अंगूठा लगवाकर शिवचरण विश्वकर्मा की ओमनी वेन को उठाकर ले जाने की जानकारी थाना प्रभारी निवास और पुलिस अधीक्षक मंडला को लिखित में आवेदन देकर गाड़ी वापस दिलाने की गुहार लगाई गई है। शिवचरण के अनुसार ओमती वेन को टैक्सी परमिट में चलाकर वह अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहा है।उसके पास आमदनी का कोई अन्य जरिया नहीं होने के कारण अब वह पूरी तरह बेरोजगार हो गया है।गाड़ी घर से निकल जाने के बाद तीन महीने से घर में कोई आवक नहीं हो रहा है।उसका परिवार दाने-दाने के लिए मोहताज हो रहा है।यह चिंता उसको खाए जा रही है।अब चिंता बढ़ती ही जा रही है,कि बाल-बच्चों को खिलाएगा क्या। बता दें,कि निवास थाना क्षेत्रांतर्गत सिंगपुर के रहने वाले शिवचरण विश्वकर्मा ने कुछ महीने पहले श्रीराम फाइनेंस कंपनी से सेकंडहेंड ओमती वेन क्रमांक MP 20 BA4806 फाइनेंस कराया था। कुछ समय बाद शिवचरण की तबियत बिगड़ जाने के कारण किस्त जमा करने का सिलसिला दो-तीन महीने से बंद हो गया।फिर 13 दिसंबर 2024 को किस्त की राशि जमा करने के बावजूद भी कंपनी का एजेंट पुष्पेन्द्र 16 जनवरी 2025 को शिवचरण के पिता के घर के आंगन में खड़ी वेन को लेकर चला गया। पढ़े-लिखे शिवचरण के पिता को डरा-धमकाकर हस्ताक्षर न लेकर कुछ अंग्रेजी में लिखे पेपरों पर अंगूठा का निशान लगवा लिया गया। ग्रामीण सीधे-सादे पिता को अश्लील गाली-गलौज कर वेन की चाबी भी ले ली गई।इस समय शिवचरण इलाज कराने डाक्टर के पास गया हुआ था।घर पहुंचने पर जानकारी मिलते ही कंपनी कार्यालय निवास पहुंचकर शिवचरण के द्वारा इस संबंध में बातचीत की गई। एजेंट पुष्पेन्द्र के द्वारा किस्त की राशि 42000 बयालीस हजार जमा करने कहने पर फरवरी में 40000 चालीस हजार भी नगद जमा कर दिया। जिसकी रसीद मांगने पर एजेंट पुष्पेन्द्र के द्वारा मार्च के बाद देने को बोल दिया गया। इसके बाद भी गाड़ी वापस नहीं करके किसी अन्य व्यक्ति को गाड़ी दे दी गई। गाड़ी किसी को रोड पर चलाते देख कंपनी से संपर्क करने गाड़ी नीलाम कर दिया जाना बताया गया। शिवचरण ने आगे बताया है,कि इस सबके बाद बकाया राशि जमा करने 8 फरवरी 2025 को कंपनी का पत्र घर आया।इतनी बड़ी नुकसानी होते देख 6 फरवरी को पुलिस थाना निवास पहुंचकर शिवचरण ने गाड़ी वापस कराने आवेदन दे दिया था । इसके बाद बड़ी उम्मीद से 13 मार्च 2025 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय मंडला पहुंचकर भी आवेदन देकर गाड़ी वापस दिलाने गुहार लगाई गई है।
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