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मतदाता सूची में एक भी गलती लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकती है।

रायसेन जिले के दीवानगंज क्षेत्र में सोमवार को उस समय प्रशासनिक हलचल तेज दिखी, जब भोपाल संभागायुक्त संजीव सिंह स्वयं मतदान केंद्रों के निरीक्षण के लिए मौके पर पहुंचे। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े फॉर्म 6, 7 और 8 की प्रगति का जायजा लिया और बीएलओ से सीधे सवाल-जवाब किए। निरीक्षण के दौरान मनीष शर्मा सहित राजस्व अमला मौजूद रहा। संभागायुक्त ने साफ शब्दों में कहा कि मतदाता सूची में एक भी गलती लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकती है। उन्होंने निर्देश दिए कि डोर-टू-डोर सत्यापन में मृत मतदाताओं, स्थानांतरित नामों और दोहरे पंजीकरण की पहचान पूरी सतर्कता से की जाए, और हर दस्तावेज का परीक्षण बिना किसी ढिलाई के हो। उनका जोर इस बात पर रहा कि समयसीमा, पारदर्शिता और सटीकता—तीनों से कोई समझौता न हो। प्रशासनिक अधिकारियों को चेताया गया कि यह सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने का जिम्मेदार काम है। निरीक्षण के दौरान रायसेन तहसीलदार भी उपस्थित रहे और जमीनी स्तर की स्थिति से अवगत कराया गया। संदेश स्पष्ट था—मतदाता सूची में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।

केके रिपोर्टर आपसे पूछता है:

आपके क्षेत्र में मतदाता सूची का सत्यापन कितना पारदर्शी और भरोसेमंद है?

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