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“देश बदल रहा है… मगर क्या रायसेन का सरकारी माइलेज भी बदलेगा…?

 “जनाब, कुछ अफसरों का दिल तो रायसेन में लगता है… मगर गाड़ी का स्टेयरिंग रोज भोपाल की तरफ मुड़ जाता है…!”

    

    

देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती खपत और पर्यावरण संकट पर पीएम मोदी ने देशवासियों से संयमित उपयोग की अपील की है। संदेश साफ था — “ईंधन बचाइए, देश बचाइए।”    

लेकिन लगता है रायसेन जिले के कुछ अधिकारियों ने इस अपील को शायद “फॉरवर्डेड मैसेज” समझ लिया है। सूत्रों की मानें तो कई अधिकारी आज भी राजधानी भोपाल से रोजाना रायसेन अप-डाउन की “तीर्थ यात्रा” पर निकलते हैं। सुबह भोपाल से निकलो, शाम को वापस लौटो… और बीच में पेट्रोल, समय और ऊर्जा का ऐसा दहन होता है कि पर्यावरण भी पूछ रहा होगा — “मेरा कसूर क्या है?” अब सवाल यह उठता है कि जब जिले में आवास, विश्राम गृह और तमाम सुविधाएं मौजूद हैं, तो रोज़ाना सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा आखिर किस मजबूरी में हो रही है? क्या यह केवल “घर का मोह” है… या फिर रायसेन की रातें अभी भी कुछ अधिकारियों को रास नहीं आ रहीं?    

मजेदार बात यह है कि आम जनता को तो साइकिल चलाने, कार पूलिंग और ईंधन बचाने की सीख दी जाती है… मगर गाड़ियों के पहिए रोज़ भोपाल हाईवे पर लोकतंत्र की स्पीड में दौड़ते दिखाई देते हैं। कर्मचारी कहते हैं कि साहब के आने तक फाइलें “धूप सेंकती” रहती हैं… और लौटने की जल्दी में कई फैसले भी ट्रैफिक सिग्नल की तरह पीले पड़ जाते हैं। अब जिले में चर्चा ये भी है कि अगर रायसेन कलेक्टर चाह लें तो “अप-डाउन संस्कृति” पर ब्रेक लग सकता है।    

क्योंकि सवाल सिर्फ पेट्रोल का नहीं… प्रशासनिक जिम्मेदारी, समय और जनता की उम्मीदों का भी है। “देश बदल रहा है… मगर क्या रायसेन का सरकारी माइलेज भी बदलेगा…? या फिर हाईवे पर दौड़ती लालबत्ती ही ‘संयमित उपयोग’ का नया मॉडल बनेगी?” 

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