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रेवातट के महायोगी श्री दादा गुरू का नरसिंहपुर आगमन

रेवा तट के महायोगी, महाव्रत धारी अवधूत दादागुरु का दिनांक 18/01/2026 को हीरापुर(चावरपाठा) नगर आगमन
मां नर्मदा सहित सभी पवित्र नदियों का जीवन बचाने तथा प्रकृति, पर्यावरण और गौवंश के संरक्षण सम्वर्धन के लिए पिछले 6 वर्षों से  सदी का सबसे बड़ा निराहार महाव्रत करने वाले अवधूत महायोगी श्री समर्थ सद्गुरु दादागुरु जी की निराहार निर्जला नर्मदा सेवा परिक्रमा का प्रवेश नगर में हो रहा है।
नर्मदा सहित सभी पवित्र नदियों के साथ साथ मिट्टी, पेड़, पहाड़ों, या संपूर्ण प्रकृति के संरक्षण संवर्धन के साथ इनकी जीवंतता की प्रामाणिकता को देश दुनिया के समक्ष प्रगट कर सदी का सबसे बड़ा निराहार महाव्रत करने वाले दादागुरु समर्थ सद्गुरु नर्मदा तट के वे महायोगी हैं, जिन्होंने अपना सर्वस्व धर्म, धरा, धेनु मां नर्मदा और प्रकृति संरक्षण सम्वर्धन में न्यौछावर कर दिया है। उन्होंने न कहीं मठ या आश्रम बनाया है, ना ही कभी कोई संचय किया है। वे तो सतत नर्मदा पथ पर गतिशील रहकर सेवा, साधना और संरक्षण संवर्धन में अपना जीवन समर्पित किए हुए हैं और ज्ञान विज्ञान को चुनौती देते हुए पिछले 6 वर्षों से सिर्फ नर्मदाजल ग्रहण कर मां नर्मदा की जीवंतता और सत्यता को देश दुनिया के सामने प्रकट कर चुके हैं।
निराहार महाव्रत के दौरान ही दादागुरु ने अनेकों यात्राओं के अतिरिक्त नर्मदा परिक्रमा के तीन चरण जिसमे प्रथम चरण सिर्फ नर्मदा जल ग्रहण कर तथा द्वितीय,तृतीय  चरण मात्र वायु ग्रहण कर पूर्ण किये। वर्तमान में वे निराहार निर्जला रहते हुए सिर्फ वायु पर मां नर्मदा की चतुर्थ चरण की पैदल परिक्रमा में हैं।
नर्मदा मिशन के संस्थापक दादागुरु पिछले दो दशकों से अधिक समय से अपने अभिनव और अकल्पनीय भागीरथी प्रयासों से  प्रकृति, पवित्र नदियां गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के कार्य को अनवरत संपादित कर रहे हैं जिसके चलते अनेकों वल्र्ड रिकॉड्र्स के साथ साथ हाई कोर्ट द्वारा किए अभूतपूर्व समाज हित निर्णय भी नर्मदा मिशन के नाम दर्ज है। समस्त विश्व रिकार्ड प्रकृति आधारित जीवन को व्यवस्थित करने तथा स्वच्छ, स्वस्थ, आत्मनिर्भर समर्थ भारत के निर्माण के अनुपम प्रयासों के लिए दिए गए हैं जो निम्नानुसार हैं-
1. प्रकृति पर्यावरण और पवित्र नदियों के संरक्षण संवर्धन के लिए  दादागुरु द्वारा किया जा रहा  निराहार महाव्रत गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज
2. स्वच्छता के लिए गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड जबलपुर नगर के नाम
3. शिव शक्ति प्रकृति और राष्ट्र आराधना की जीवंत मिसाल जबलपुर की संस्कार कावडय़ात्रा रन फॉर नेचर गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज
4. वृक्ष रक्षा संकल्प महोत्सव अमरकंटक लिम्का बुक ऑफ  वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज
इसके अलावा देश दुनिया के इतिहास में पहली बार प्रकृति जीवनदायनी पवित्र नदियों के संरक्षण व समर्थ स्वस्थ राष्ट्र की संकल्पना पर केंद्रित दादागुरु की महाव्रत साधना के लिए तीन विश्व कीर्तिमान एक साथ दिए गए हैं-
5. दादा गुरु की निराहार पैदल 3200 किमी की नर्मदा परिक्रमा गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज
6. 1000 दिनों से ऊपर चल रहा दादागुरु का दुनिया का सबसे बड़ा निराहार महाव्रत गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज
7. निराहार महाव्रत के दौरान दादागुरु की तीन बार रक्तदान सेवा गोल्डन बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में दर्ज
इन विश्वकीर्तिमान से अतिरिक्त दादागुरु द्वारा जो अन्य विशेष प्रयास प्रकृति पर्यावरण के लिए किए गए हैं उनमें प्रमुख हैं
1. नर्मदा मिशन की याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा उच्चतम बाढ़ सीमा से 300 मीटर का परिक्षेत्र मां नर्मदा की प्रॉपर्टी घोषित
2. नर्मदा मिशन की याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा नर्मदा सहित सभी पवित्र नदियों में मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध
3. गौर गणेश का निर्माण
4. गौवंश के संरक्षण के लिए मप्र की प्रथम गौ सेवा हेल्पलाइन का आरंभ, समर्थ गौ सेवा एक्सप्रेस का आरंभ, समर्थ गौ चिकित्सा केंद्रों और गौशालाओं की स्थापना,  निशुल्क समर्थ गौ डायग्नोस्टिक की स्थापना
5. जल संरक्षण शुद्धिकरण के लिए दीपदान के स्थान पर दीपयज्ञ अभियान, सरोवर हमारी धरोहर अभियान, गोबर गैस और जल ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना, समय-समय पर मां नर्मदा के तटों की सफाई, रायपेरियन जोन में अनवरत वृक्षारोपण
तो आइए इस सदी की सबसे बडी मुहिम का हिस्सा बनें और सत्य के साथ कदम बढ़ाएं।

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