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Press Sewa Portal पर देरी से बढ़ी परेशानी, नरसिंहपुर में ऑनलाइन आवेदनों का इंतज़ार

नरसिंहपुर | मामला: 2024–25

भारत सरकार द्वारा प्रेस एवं पत्र-पंजीकरण अधिनियम, 2023 लागू किए जाने के बाद देशभर में अख़बारों और पत्रिकाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया गया। इसके लिए Press Sewa Portal बनाया गया, ताकि आवेदन पारदर्शी हों, समयबद्ध निपटें और अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर खत्म हों।

इस नए सिस्टम के तहत प्रत्येक ज़िले में निर्दिष्ट प्राधिकारी (Specified Authority) की भूमिका तय की गई है। आमतौर पर यह जिम्मेदारी जिला कलेक्टर की होती है या उनके द्वारा अधिकृत किसी अधिकारी की। इसी व्यवस्था को लेकर नरसिंहपुर ज़िले में हाल के महीनों में देरी की स्थिति सामने आ रही है।

मामला कब से?

Press seva portal
सांकेतिक चित्र

प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा मई 2024 में सभी ज़िलों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों में कहा गया कि निर्दिष्ट प्राधिकारी को Press Sewa Portal पर ऑनबोर्ड किया जाए, लॉग-इन आईडी बनाई जाए और सभी आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही संसाधित हों।

लेकिन स्थानीय स्तर पर यह प्रक्रिया समय पर पूरी न होने से कई ऑनलाइन आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जिनके काम अब पूरी तरह डिजिटल सिस्टम से जुड़े हैं।

क्यों ज़रूरी है ऑनबोर्डिंग?

प्रशासनिक जानकार बताते हैं कि जब तक निर्दिष्ट प्राधिकारी की आधिकारिक आईडी सक्रिय नहीं होती, तब तक पोर्टल पर आए आवेदनों पर टिप्पणी या अनापत्ति दर्ज नहीं हो सकती। नतीजा यह कि आवेदन सिस्टम में अटके रहते हैं, जबकि आवेदक रोज़ाना स्थिति जानने को मजबूर होते हैं।

पड़ोसी ज़िले का उदाहरण

सूत्रों के मुताबिक पड़ोसी ज़िला छिंदवाड़ा इस मामले में एक उदाहरण बनकर सामने आया है, जहाँ कलेक्टर द्वारा अपर कलेक्टर को इस दायित्व के लिए प्रभारी बनाया गया। इससे Press Sewa Portal से जुड़े काम वहां सुचारु रूप से चल रहे हैं।

इसी तुलना के चलते नरसिंहपुर में भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या ऐसी ही प्रशासनिक व्यवस्था अपनाकर देरी को दूर किया जा सकता है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि नया क़ानून और नई डिजिटल व्यवस्था होने के कारण प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी और प्रक्रियागत समन्वय में समय लगना स्वाभाविक है। हालांकि यह भी स्वीकार किया जा रहा है कि समयबद्ध निर्णय से ऐसी असुविधाओं को रोका जा सकता है।

आम लोगों की परेशानी

जिन लोगों के आवेदन इस पोर्टल से जुड़े हैं, उनके लिए यह देरी केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की परेशानी बन चुकी है। कई मामलों में आगे की योजनाएं, दस्तावेज़ और प्रक्रियाएं इसी पंजीकरण पर निर्भर होती हैं।


केके रिपोर्टर आपसे पूछता है…

जब केंद्र सरकार ने पूरी व्यवस्था डिजिटल और समयबद्ध बना दी है, तो ज़िला स्तर पर छोटी-सी प्रशासनिक देरी आम लोगों की परेशानी क्यों बन जाए?

आपकी राय क्या है — समाधान क्या होना चाहिए? कमेंट में ज़रूर बताइए।

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