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शराब नीति या खुली लूट? ठेकेदारों का राज! जिम्मेदार कौन होगा… ये बिकाऊ सिस्टम या बेलगाम शराब माफिया?

रायसेन वालों, क्या आपके यहाँ सरकार चल रही है या शराब माफियाओं का खुला राज? क्योंकि बाड़ी और अमरावद में आबकारी नीति 2026-27 के नाम पर जो ‘लूट की खुली छूट’ चल रही है, उसे देखकर तो यही लगता है कि पूरा का पूरा सिस्टम ही ठेकेदारों की जेब में गिरवी रखा है! बाड़ी की शराब दुकान आबकारी विभाग नहीं, बल्कि ‘सोम’ कंपनी के कर्मचारियों के भरोसे चल रही है और प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहा है। गरीब और मजदूर जो 75 रुपये का सफेद क्वार्टर लेने जाता है, उसकी जेब से सरेआम 100 रुपये निकाले जा रहे हैं, यानी हर क्वार्टर पर सीधे 25 रुपये की दिन-दहाड़े डकैती! युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने का इनका खतरनाक मास्टरप्लान देखिए; नई पीढ़ी को लत लगाने के लिए बीयर कैन एमआरपी पर दिए जा रहे हैं, लेकिन जो आदी हो चुके हैं उनसे बीयर की बोतल पर 60 रुपये तक ज्यादा वसूले जा रहे हैं। हर दिन 3 से 4 लाख रुपये की अवैध और दो नंबर की शराब बिना किसी रिकॉर्ड के गांवों में खपाई जा रही है। बरेली, बाड़ी और अमरावद के ठेकेदारों की इस वर्चस्व की जंग में अब ग्रामीण क्षेत्रों में शराब माफियाओं के बीच किसी भी दिन भयानक ‘गैंगवार’ हो सकता है, लेकिन आबकारी विभाग ने तो जैसे कानों में रुई और आंखों पर पट्टी बांध रखी है। इसलिए आज ‘केके’ पूछ रहा है सिस्टम से ये 5 तीखे सवाल: पहला- क्या सरकार अपनी ही आबकारी नीति पर पूरी तरह से नियंत्रण खो चुकी है? दूसरा- 75 का क्वार्टर 100 में बिकने पर आबकारी विभाग ओवररेटिंग के खिलाफ मौन क्यों है? तीसरा- गांवों में जो रोज लाखों की अवैध शराब पहुंचाई जा रही है, उसमें किस-किस साहब का कमीशन सेट है? चौथा- ‘सोम’ कंपनी के कर्मचारियों को सरकारी दुकान चलाने का ठेका किस नियम के तहत सौंप दिया गया? और पांचवा, सबसे कड़क सवाल- जब गांवों में इन ठेकेदारों का गैंगवार होगा और लट्ठ चलेंगे, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा… ये बिकाऊ सिस्टम या बेलगाम शराब माफिया?

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