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कलेक्टर ने किया जिला चिकित्सालय का आकस्मिक निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार पर जताया संतोष।

बालाघाट

कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने गुरुवार को जिला चिकित्सालय बालाघाट का आकस्मिक निरीक्षण कर अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप तथा स्वास्थ्य मिशन के उपयंत्री उपस्थित रहे।

निरीक्षण में पाया गया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुरूप अस्पताल में शौचालय एवं ड्रेनेज

संबंधी कार्य कराए गए हैं, जिससे साफ-सफाई की व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मरीजों से चर्चा के दौरान भी प्रसूति वार्ड की सेवाओं में सुधार की पुष्टि हुई। गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग व्यवस्था पहले की अपेक्षा बेहतर पाई गई।

👉     प्रसूति वार्ड और 108 एम्बुलेंस सेवा की समीक्षा
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कलेक्टर ने ट्रॉमा सेंटर में संचालित महिला एवं प्रसूति वार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रसव हेतु आने वाली महिलाओं

की जांच एवं काउंसलिंग प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली। महिलाओं से चर्चा में पता चला कि कटंगी तहसील के नेहलेसरा तथा बिरसा तहसील के सोनगुड्डा से आई महिलाओं ने 108 एम्बुलेंस सेवा का उपयोग किया और उनके साथ आशा कार्यकर्ता भी मौजूद थीं। महिलाओं ने बताया कि एम्बुलेंस सेवा के लिए उनसे कोई शुल्क नहीं लिया गया।

कलेक्टर ने भर्ती महिलाओं की रिकॉर्ड फाइलों

का निरीक्षण कर निर्देश दिए कि आशा कार्यकर्ता के नाम के साथ काउंसलिंग में दी गई सलाह भी अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए। उन्होंने 108 एम्बुलेंस सेवा के लिए काउंसलिंग कक्ष के पास 24 घंटे मार्गदर्शन कक्ष संचालित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही प्रसूति वार्ड में महिलाओं के परिजनों के बैठने हेतु कुर्सियों एवं बेंचों की संख्या बढ़ाने को कहा।

  भर्ती के बाद महिलाओं के चले जाने पर नाराज़गी
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अस्पताल प्रशासन ने बताया कि जनवरी 2026 में 753 गर्भवती महिलाओं को प्रसव हेतु भर्ती किया गया, जिनमें से लगभग 90 महिलाएँ स्वयं की इच्छा से या बिना सूचना दिए चली गईं। इस पर कलेक्टर ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए काउंसलिंग व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रसव में लगने वाले संभावित समय की स्पष्ट जानकारी महिलाओं और उनके परिजनों को दी जानी चाहिए।
उन्होंने निर्देशित किया कि बिना सूचना अस्पताल छोड़ने वाली महिलाओं के मामलों में ड्यूटी पर तैनात वार्ड बॉय, नर्सिंग ऑफिसर एवं संबंधित आशा कार्यकर्ता को नोटिस जारी कर कारणों की जांच की जाए। साथ ही ऐसी महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की जानकारी एकत्र कर रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए।
सीएमएचओ को निर्देशित किया गया कि खंड चिकित्सा अधिकारी गर्भवती महिलाओं को अनावश्यक रूप से या प्रसव से काफी पहले जिला चिकित्सालय रेफर न करें।
👉    प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुझान रोकने के
 निर्देश
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कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए कि जिला चिकित्सालय में प्रसव हेतु आने वाली महिलाओं को निजी अस्पताल जाने की आवश्यकता न पड़े, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। प्रसूति वार्ड में कार्यरत कर्मचारियों की ड्यूटी रोटेशन प्रणाली लागू कर नियमित परिवर्तन सुनिश्चित करने को कहा गया।
अस्पताल परिसर में निजी एम्बुलेंस की एंट्री पर सख्ती से रोक लगाने तथा रात्रि में भी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
    एसएनसीयू का निरीक्षण, नवजातों को मिलेगा त्वरित उपचार
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कलेक्टर ने ट्रॉमा सेंटर में संचालित एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि एसएनसीयू पूर्व में पुराने भवन में संचालित थी, जिसे अब प्रसूति वार्ड के पास ट्रॉमा सेंटर भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे नवजात शिशुओं को त्वरित उपचार मिल सके।
     👉      स्वच्छता व्यवस्था पर सख्ती
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ट्रॉमा सेंटर में नव निर्मित पुरुष एवं महिला शौचालयों तथा सुधारी गई ड्रेनेज व्यवस्था का भी निरीक्षण किया गया। कलेक्टर ने सफाई व्यवस्था पर ध्यान न देने के कारण संबंधित सफाई फर्म पर पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए।
साथ ही एनआरएचएम उपयंत्री को नेत्र वार्ड विस्तार कार्य शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए।

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