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नकली हैमर मार्क से अवैध लकड़ी परिवहन का खुलासा, वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।

बालाघाट

 जिले में अवैध लकड़ी परिवहन के एक मामले ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के दौरान सामने आया कि ट्रकों में बड़ी मात्रा में लकड़ी बिना वैध ट्रांजिट पास के परिवहन की जा रही थी,

जबकि लकड़ी पर पुराने सरकारी हैमर मार्क की कथित नकल का उपयोग किया गया था। इससे यह आशंका गहरा गई है कि अवैध लकड़ी को वैध दर्शाने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जी चिन्हों का इस्तेमाल किया गया।

मामले में अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि पुराने सरकारी हैमर मार्क किसके पास पहुंचे, उनकी नक़ल किसने तैयार कराई और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही। प्रारंभिक जांच के बाद अब अधिकारियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), विभागीय दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, जब्त लकड़ी और उससे जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है। जांच का दायरा वन विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ लकड़ी कारोबार से जुड़े लोगों तक भी बढ़ाया गया है।
बताया जा रहा है कि पूरे प्रकरण में ट्रांजिट पास जारी करने की प्रक्रिया, लकड़ी की वैधता, हैमर मार्क के उपयोग और विभागीय निगरानी व्यवस्था की भी जांच की जाएगी। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया जा सकता है।
जांच एजेंसियों के सामने अब कई अहम प्रश्न हैं— पुराने सरकारी हैमर मार्क किसके कब्जे में थे, बिना ट्रांजिट पास लकड़ी ट्रकों तक कैसे पहुंची, मार्किंग और सत्यापन प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई तथा पूरे घटनाक्रम से किसे लाभ मिला। इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में जांच की दिशा तय करेंगे।
प्रकरण की अगली कड़ी में सीडीआर, विभागीय रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना जताई जा रही है।

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