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न्याय मांगने गया आदमी… खुद बन गया शिकार! बेगमगंज में वकील की कथित धोखाधड़ी उजागर!

सोचिए… जिस व्यक्ति को हम न्याय का मार्गदर्शक मानते हैं, जिस पर अपना भविष्य और भरोसा सौंपते हैं—अगर वही व्यक्ति हमें धोखा दे दे, तो आम आदमी आखिर जाएगा कहां? बेगमगंज से इस वक्त एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। पूर्व शासकीय अधिवक्ता बद्रीविशाल गुप्ता पर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज पेश करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ग्राम बरखुआ निवासी रामबाबू लोधी, जो इन दिनों भोपाल में मजदूरी करते हैं, बताते हैं कि उन्होंने अपनी जमीन पर फौती नामांतरण कराने के लिए 1500 रुपये वकील को दिए थे, लेकिन न काम हुआ, न कोई जानकारी मिली—उल्टा वकालतनामा पर हस्ताक्षर करा लिए गए। मामला तब सामने आया जब गांव के शंकरलाल यादव ने बताया कि तहसील न्यायालय की पेशी में वकील ने रामबाबू के नाम के कागज़ एक ऐसे प्रकरण में लगा दिए, जिसका उनसे कोई संबंध ही नहीं था—प्र.क्र. 35 अ-70/2024-25, शंकरलाल बनाम इकलेश। यह सुनते ही रामबाबू के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत तहसील, एसडीएम और अदालत में लिखित आवेदन व शपथ पत्र देकर साफ कहा कि इस केस से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उनके कागज़ों का गलत इस्तेमाल किया गया है। आरोप यह भी है कि जब रामबाबू ने विरोध जताया, तो वकील ने झूठे केस में फँसाने की धमकी दे डाली। मामला सामने आते ही एसडीएम ने इसे गंभीरता से लिया और पुलिस ने भी तत्परता दिखाते हुए बद्रीविशाल गुप्ता के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4) और 296B के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब न्याय दिलाने वाले पर ही प्रश्न उठने लगें, तो आम आदमी किसके पास जाए? क्या हमारे सिस्टम में ऐसी घटनाएँ लोगों का भरोसा कमजोर नहीं करतीं? और क्या ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी नहीं हो जाती? आप क्या सोचते हैं—क्या वकील द्वारा फर्जी दस्तावेज़ लगाना आम नागरिक के अधिकारों पर सीधा हमला नहीं है?

पूर्व शासकीय अधिवक्ता बद्रीविशाल गुप्ता

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