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विपरीत परिस्थितियों से जूझते हुए बुध्दांश बागड़े ने हासिल की उल्लेखनीय सफलता।

वारासिवनी / बालाघाट

जन्म के साथ ही गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना करने वाले नन्हे बालक बुध्दांश बागड़े

बौद्ध” ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। महज़ पाँच वर्ष की आयु में बुध्दांश गंभीर नेत्र रोग केराटोकोनस से ग्रसित हो गया, जिसके उपचार हेतु उसके माता-पिता ने रिश्तेदारों एवं शुभचिंतकों की मदद से लाखों रुपये एकत्रित कर उपचार कराया। बीमारी और उपचार की कठिन प्रक्रिया का प्रभाव उसकी पढ़ाई पर भी पड़ा, फिर भी बुध्दांश ने हिम्मत नहीं हारी।

स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं के बावजूद बुध्दांश ने जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके पश्चात उसकी दूसरी आँख का भी बड़ा ऑपरेशन किया गया। कठिन उपचार और स्वास्थ्य संघर्षों के बीच बुध्दांश ने अध्ययन जारी रखा और जिला स्तरीय जनरल नॉलेज परीक्षा में उच्च सफलता अर्जित कर सभी को गौरवान्वित किया।
वर्तमान में बुध्दांश बागड़े कक्षा 7वीं “ब” में जेएनयू विद्यालय, वारासिवनी में अध्ययनरत है। उसकी इस प्रेरणादायक सफलता ने न केवल विद्यालय, बल्कि उसकी माता अन्नपूर्णा बागड़े “बौद्ध” एवं पिता जीतु सी. एन. बौद्ध (समाज सेवक एवं सामाजिक विश्लेषक) का नाम भी रोशन किया है।

बुध्दांश की उपलब्धि यह सिद्ध करती है कि विपरीत परिस्थितियाँ भी दृढ़ इच्छाशक्ति और सतत प्रयासों के आगे झुक जाती हैं। उसकी कहानी अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

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