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“साहब! अनपढ़ होने का फायदा उठाया, जमीन हड़प ली और अब धमकियां दे रहे हैं…” रायसेन में न्याय के लिए दर-दर भटक रही बेसहारा बुजुर्ग मां

रायसेन/गीदगढ़। झुर्रियों से भरा चेहरा, आंखों में बेबसी और कांपते हाथों में न्याय की गुहार लगाते हुए दस्तावेजों का पुलिंदा। यह तस्वीर रायसेन जिले के दीवानगंज चौकी के ग्राम गीदगढ़ की रहने वाली बेवा (विधवा) कलाबाई की है। मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंची इस बुजुर्ग मां की कहानी उस सिस्टम पर करारा तमाचा है, जो गरीबों और मजलूमों को त्वरित न्याय दिलाने का दावा करता है।

भलाई का सिला मिला धोखे और कब्जे से

कलाबाई ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस रिश्तेदार को उन्होंने मदद के तौर पर जगह दी थी, उसी का परिवार उनके बुढ़ापे का नासूर बन जाएगा। दस्तावेजों के अनुसार, कलाबाई के मकान के पीछे 45 वर्गफीट की खाली जगह थी। करीब 10-12 साल पहले उन्होंने अपने भांजे मिश्रीलाल को भूसा रखने के लिए 20 वर्गफीट जगह दी थी। मिश्रीलाल के निधन के बाद, उसके बेटे प्रेम सिंह, सनमान सिंह और नीरज ने इंसानियत को ताक पर रखते हुए इस पूरी जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया।

अनपढ़ होने का उठाया फायदा, फर्जी दानपत्र बनवाया

कलयुगी रिश्तेदारों की दबंगई यहीं नहीं रुकी। उन्होंने कलाबाई के अनपढ़ होने का फायदा उठाया और धोखे से अंगूठा लगवाकर एक फर्जी दानपत्र तैयार कर लिया। दबंगों ने बुजुर्ग के मकान के पीछे वाले पुश्तैनी रास्ते पर ‘टपरिया’ (झोपड़ी) बनाकर उनका रास्ता भी हमेशा के लिए बंद कर दिया है।

सरपंच से छीना पंचनामा, भोपाल से बुलाए गुंडे

जब यह बेबस मां अपने हक के लिए आवाज उठाती है, तो उसे भद्दी गालियां दी जाती हैं। दबंगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि जब गांव के सरपंच लीला किशन और चौकीदार मनोज मौके पर पंचनामा बना रहे थे, तो आरोपी प्रेम सिंह ने सरेआम वह पंचनामा छीन लिया। हद तो तब हो गई जब इन लोगों ने भोपाल से गुंडे बुलवाकर कलाबाई के बेटे ठाकुर सिंह को जान से मारने की धमकियां देना शुरू कर दिया।

सिस्टम की संवेदनहीनता: 8 महीने से फाइलों में दबी है चीख

इस मामले का सबसे दर्दनाक पहलू पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली है। कलाबाई न्याय के लिए 4 अक्टूबर 2025 से दीवानगंज पुलिस चौकी के चक्कर काट रही हैं। 14 अक्टूबर 2025 को भी उन्होंने जनसुनवाई में एसपी और कलेक्टर के सामने गुहार लगाई थी। लेकिन ‘फाइलों के बोझ’ तले इस बुजुर्ग की चीखें कहीं दब गईं। 8 महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। थक-हारकर 9 जून 2026 को यह बुजुर्ग एक बार फिर जनसुनवाई में पहुंची।

क्या प्रशासन को अनहोनी का इंतजार है?

सवाल यह उठता है कि क्या दीवानगंज पुलिस और रायसेन प्रशासन को किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है? क्या दबंगों के रसूख के आगे कानून ने घुटने टेक दिए हैं? जीवन के अंतिम पड़ाव पर खड़ी कलाबाई बस अपनी ही जमीन और सुकून से जीने का हक मांग रही हैं। देखना यह है कि क्या इस बार इस बुजुर्ग मां के आंसू किसी अधिकारी का जमीर जगा पाएंगे, या ये शिकायतें फिर से किसी लाल फीते में बंधकर रह जाएंगी।

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