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<p>राम मंदिर चढ़ावा चोरी: भगवान के दरबार में ही लुटी आस्था — एक महाघोटाले की पूरी कहानी

अभयवाणी समाचार पत्र | विशेष रिपोर्ट | जून 2026

भूमिका: आस्था पर चोट

22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की थी। करोड़ों हिंदुओं की दशकों पुरानी आस्था उस दिन साकार हुई थी। देश-विदेश से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु प्रतिदिन रामलला के दर्शन को पहुंचने लगे और अपनी श्रद्धा से दानपात्रों में नोट, सोने-चांदी के आभूषण और कीमती वस्तुएं चढ़ाने लगे। लेकिन जून 2026 में एक ऐसा खुलासा हुआ जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया — जिन लोगों को इस पवित्र दान की रक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उन्हीं में से कुछ लोग उस दान को चुरा रहे थे।

यह महज चोरी का मामला नहीं है। यह भगवान राम के नाम पर करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ किए गए विश्वासघात का मामला है।

घटनाक्रम: कैसे हुआ खुलासा?

मई 2026 — संदेह की शुरुआत

ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने मई 2026 के अंतिम सप्ताह में बैंक में जमा हो रही दान राशि के आंकड़ों का मिलान किया। आंकड़े चौंकाने वाले थे। दानपेटियों में औसत से कम चढ़ावा दर्ज हो रहा था, जबकि मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बड़ी संख्या में आ रही थी। चोरी को पकड़ने के लिए उस कक्ष में गुप्त कैमरे (Hidden Cameras) लगाए गए जहां दानपेटियां खोलकर नोटों की गिनती होती थी।

7 जून 2026 — पहला सार्वजनिक आरोप

समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे ने सार्वजनिक मंच से आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्रों से 7 से 7.5 करोड़ रुपये का गबन हुआ है। इस बयान से अयोध्या में राजनीतिक भूचाल आ गया।

9 जून 2026 — CBI जांच की मांग

भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर CBI जांच की मांग की। इसके बाद PMO ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से रिपोर्ट मांगी।

13 जून 2026 — SIT का गठन

विवाद बढ़ता देख उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट की सिफारिश पर 3-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। SIT ने अयोध्या में 6 दिनों तक डेरा डालकर वित्तीय दस्तावेजों, दानपात्रों के रिकॉर्ड और कैश काउंटिंग की पूरी प्रक्रिया की जांच की।

25 जून 2026 — FIR दर्ज

SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत पर राम जन्मभूमि कोतवाली में 8 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316, 317, 317(4), 317(5), 61, 3(5) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) की धाराएं लगाई गईं।

26 जून 2026 — 8 गिरफ्तारियां और इस्तीफे

SIT और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सभी 8 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान आरोपियों के घरों से भारी नकदी भी बरामद हुई। इसी दिन ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।

SIT की 20 पन्नों की रिपोर्ट: क्या-क्या उजागर हुआ?

SIT ने CCTV फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और आरोपियों की पूछताछ के आधार पर 20 पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हैं:</p>

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<li>70 बार चोरी कैमरे में कैद CCTV फुटेज में चढ़ावा चोरी की कुल 70 घटनाएं दर्ज पाई गईं। यह रैकेट पिछले 2 से 3 वर्षों से संचालित हो रहा था।</li>

<li>गणना कक्ष में बड़ी खामियां भेंट और चढ़ावे की गणना कक्ष तक नकदी के संचालन और प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर खामियां पाई गईं। SOP का पालन नहीं हो रहा था।</li>

<li>बिना अनुमति चाबी रिपोर्ट में सामने आया कि टिन्नू यादव के पास बिना किसी आधिकारिक आदेश के हुंडियों (दानपात्रों) की चाबी थी।</li>

<li>बैंक कर्मियों की संदिग्ध भूमिका पूछताछ के दौरान कई बैंक अधिकारियों के नाम भी सामने आए। रिपोर्ट में सरकारी बैंक के कुछ कर्मचारियों की कथित संलिप्तता के संकेत मिले हैं।</li>

<li>SOP तैयार थी, पर पालन नहीं हुआ सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में ट्रस्ट और स्टेट बैंक के बीच गणना प्रक्रिया को लेकर Standard Operating Procedure (SOP) तैयार की गई थी। स्टेट बैंक की ओर से गोविंद मिश्र और ट्रस्ट की ओर से अनिल मिश्र ने हस्ताक्षर किए थे। लेकिन बाद में इस SOP का पालन ही नहीं हुआ।</li>

<li>सोना-चांदी भी निशाने पर जांच में सामने आया कि केवल नकदी ही नहीं, भक्तों के चढ़ाए सोने, चांदी और हीरे के आभूषण भी गायब किए गए। हालांकि SIT ने बाद में स्पष्ट किया कि चांदी के हार-पादुकाएं ट्रस्ट की कस्टडी में सुरक्षित हैं।

8 गिरफ्तार आरोपी: कौन हैं और क्या था इनका काम?

नाम

भूमिका

बरामदगी

रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू

चंपत राय का ड्राइवर, दानपात्र बेसमेंट तक पहुंचाने का काम

करोड़ों की संपत्ति

सुभाष चंद्र श्रीवास्तव

कैश काउंटिंग स्टाफ का प्रभारी

जानबूझकर लापरवाही

अनुकल्प मिश्रा

कैश काउंटिंग टीम, बाथरूम में पैसे छुपाता था

करोड़ों की संपत्ति

लवकुश मिश्रा

कैश काउंटिंग कर्मचारी

12 लाख नकद बरामद

मनीष यादव

कैश काउंटिंग टीम

36 लाख नकद बरामद

करुणेश पांडेय

दानपात्र से गणना कक्ष तक नकदी पहुंचाना

जमीनें खरीदीं

अविनाश शुक्ल

दानपात्र से गणना कक्ष तक निगरानी

संपत्तियां बनाईं

रमाशंकर मिश्रा

दान राशि गणना कक्ष तक लाना

संपत्तियां बनाईं

SIT ने अपनी रिपोर्ट में टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव को कथित साजिश रचने और उसे अंजाम देने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाला बताया है।

चढ़ावे के आंकड़ों में रहस्यमयी गिरावट

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार:

2020 से 2024 (4 साल): प्रतिदिन औसतन ₹2.43 करोड़ चढ़ावा

2024-25 (14 महीने): प्रतिदिन केवल ₹36 लाख चढ़ावा

2025-26: प्रतिदिन सिर्फ ₹16.6 लाख चढ़ावा

यह आंकड़े खुद अपनी कहानी बयान करते हैं। जिस मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी, उस मंदिर में चढ़ावा क्यों घटता गया?

वर्ष 2024-25 में ट्रस्ट की कुल आमदनी 327 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 153 करोड़ रुपये चढ़ावे के रूप में मिले थे।

महाकुंभ 2025 का रहस्य

SIT की जांच का सबसे महत्वपूर्ण फोकस महाकुंभ 2025 के दौरान आए चढ़ावे पर है। महाकुंभ के दौरान अयोध्या में करोड़ों श्रद्धालु रामलला के दर्शन को आए थे। सामान्य तर्क कहता है कि जब भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ी, तो चढ़ावा भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए था। लेकिन कागजों पर ऐसा कोई उछाल नहीं दिखा। SIT इसी पहेली को सुलझाने में जुटी है।

VIP सेटिंग और CCTV फुटेज का रहस्य

जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। मंदिर में आने वाले VIP और VVIP मेहमानों के साथ ट्रस्ट के करीबी लोग अपनी सेटिंग कर लेते थे। इन रसूखदारों को बिना लाइन के &#39;स्पेशल दर्शन&#39; कराए जाते थे और उनकी गाड़ियां सीधे परिसर के अंदर तक आती थीं।

इसके अलावा, विपक्ष ने CCTV फुटेज डिलीट होने का आरोप भी लगाया। ट्रस्ट को पहले ही सुझाव दिया गया था कि डेटा सुरक्षित रखने के लिए Cloud Memory ली जाए या किसी IT कंपनी को काम सौंपा जाए। लेकिन ट्रस्ट ने &quot;ज्यादा पैसे खर्च होंगे&quot; कहकर इस सुझाव को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा: अंदर की कहानी

गिरफ्तार आरोपियों में चंपत राय के ड्राइवर और करीबी सहयोगी टिन्नू यादव का नाम भी था। इससे महासचिव की छवि सवालों के घेरे में आ गई।

सूत्रों के अनुसार, चंपत राय इस्तीफा देने के लिए तैयार नहीं थे। लंबे समय तक मान-मनौव्वल होती रही। लेकिन जब RSS और केंद्र सरकार दोनों ने सख्त संदेश दिया, तो उन्हें झुकना पड़ा। PMO के फरमान और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख के बाद आखिरकार चंपत राय और अनिल मिश्रा दोनों ने ट्रस्ट के पद से इस्तीफा दे दिया।

अब सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाएगा और विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा चंपत राय की जगह ले सकते हैं।

चार बड़े विवाद: पहले भी खड़े हुए थे सवाल

यह पहला मामला नहीं है जब राम मंदिर प्रबंधन पर उंगलियां उठी हों। प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अब तक चार बड़े विवाद सामने आ चुके हैं:</li>

<li>रामलला का मुकुट चोरी — प्राण प्रतिष्ठा के कुछ महीनों बाद रामलला का बेशकीमती मुकुट चोरी हो गया था। शुरुआत में मामला दबाने की कोशिश हुई, लेकिन बाद में मुकुट ट्रस्ट के ही एक रसूखदार पदाधिकारी के करीबी व्यक्ति के पास से मिला।</li>

<li>जमीन खरीद में अनियमितता — मंदिर निर्माण के दौरान जमीन खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे। मंदिर निर्माण से जुड़े एक पूर्व इंजीनियर ने भी वित्तीय गड़बड़ी और कमीशनखोरी के आरोप लगाए।</li>

<li>निर्माण में 40% कमीशन का आरोप — ताजा रिपोर्टों में मंदिर निर्माण कार्यों में चहेतों और रिश्तेदारों को टेंडर देकर फायदा पहुंचाने के आरोप भी उभरे हैं।</li>

<li>चढ़ावा चोरी — यह सबसे ताजा और सबसे बड़ा विवाद है, जिसने देशव्यापी चर्चा छेड़ दी है।

राजनीतिक तूफान

इस मामले में विपक्ष पूरी तरह आक्रामक है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम के दरबार में हुए इस बड़े घोटाले का सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। उन्होंने असली दोषियों तक पहुंचने के बजाय मामले को भटकाने और लखनऊ से मॉनिटरिंग कर रसूखदारों को बचाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने व्यंग्य में कहा — &quot;फुनगी को फांसी, शाखाओं को माफी।&quot;

सपा सांसद अफजाल अंसारी ने मांग की कि जांच चारों पीठों के शंकराचार्यों की निगरानी में हो।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने SIT गठन को लीपापोती बताते हुए कहा कि सरकार बड़े लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है।

10 बड़े सवाल जो अभी भी बेजवाब हैं

प्रश्न 1: जब SOP सितंबर 2024 और फरवरी 2025 में तैयार कर ली गई थी, तो उस पर अमल क्यों नहीं हुआ? और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?

प्रश्न 2: महाकुंभ 2025 में करोड़ों श्रद्धालुओं के बावजूद चढ़ावे में भारी गिरावट क्यों दर्ज हुई? क्या उस दौरान आए चढ़ावे को जानबूझकर कम दिखाया गया?

प्रश्न 3: 2020 से 2024 के बीच रोज ₹2.43 करोड़ का चढ़ावा आता था, लेकिन 2025-26 में यह घटकर सिर्फ ₹16.6 लाख रह गया। इस भारी अंतर की जांच क्या पुराने वर्षों तक भी होगी?

प्रश्न 4: चंपत राय के ड्राइवर के पास हुंडियों की चाबी कैसे और किसके आदेश से थी? क्या यह सब किसी बड़े के इशारे पर चल रहा था?

प्रश्न 5: जांच में बैंक अधिकारियों के नाम भी उजागर हुए हैं — क्या उनके खिलाफ भी ठोस कार्रवाई होगी, या वे बच निकलेंगे?

प्रश्न 6: CCTV फुटेज के लिए Cloud या IT कंपनी का सुझाव नकारने के पीछे क्या असली कारण था? क्या यह जानबूझकर साक्ष्य नष्ट करने की मंशा थी?

प्रश्न 7: चंपत राय ने इस्तीफा नैतिकता के आधार पर दिया या दबाव में? यदि वे निर्दोष थे, तो क्यों झुके?

प्रश्न 8: क्या यह रैकेट केवल 8 लोगों तक सीमित था, या इसके तार ऊपर तक जुड़े हैं? SIT की अंतिम रिपोर्ट में यह स्पष्ट होना चाहिए।

प्रश्न 9: ट्रस्ट को मई 2026 में ही चोरी का संदेह हो गया था — फिर 7 जून तक, यानी करीब 6 सप्ताह तक, मामला सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ?

प्रश्न 10: क्या आगे CBI जांच होगी? और क्या ट्रस्ट के पुनर्गठन के साथ-साथ दान प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और ऑडिट-योग्य बनाया जाएगा?

अभयवाणी का नजरिया

यह प्रकरण केवल कुछ चोर कर्मचारियों की कहानी नहीं है। यह उस पूरे सिस्टम की विफलता की कहानी है जिसे देश की सबसे बड़ी धार्मिक आस्था की रक्षा का जिम्मा सौंपा गया था। एक तरफ करोड़ों श्रद्धालु अपनी जीवनभर की कमाई का हिस्सा रामलला के चरणों में अर्पित कर रहे थे, दूसरी तरफ भरोसेमंद कहलाने वाले लोग उस दान को अपनी जेब में भर रहे थे।

जब तक संपूर्ण और निष्पक्ष जांच नहीं होती, जब तक हर दोषी को — चाहे वह कितना भी रसूखदार हो — कड़ी सजा नहीं मिलती, और जब तक दान प्रबंधन की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह नहीं बनती, तब तक करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को न्याय नहीं मिलेगा।

अभयवाणी समाचार पत्र की मांग है कि इस पूरे मामले की सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में CBI जांच हो और दोषियों को कठोरतम दंड दिया जाए।

रिपोर्ट: अभयवाणी ब्यूरो | अयोध्या/लखनऊ प्रकाशन तिथि: 29 जून 2026 स्रोत: Times Now Navbharat, Aaj Tak, ETV Bharat, Navjivan India, Dynamite News, Webdunia, TV9 Hindi, OneIndia Hindi

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   <span class=”hljs-keyword”>return</span> foo + <span class=”hljs-string”>’:'</span> + s;

}

</code></pre>

<p>Or inline code like <code>var foo = &#39;bar&#

39;;</code>.</p>

<p>Or an image of bears</p>

<p><img src=”http://placebear.com/200/200″ alt=”bears”></p>

<p>The end …</p>

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